ग्राइंडिंग व्हील में प्रयोग होने वाले बाइन्डर के प्रकार – Types of Binders or Bond in Grinding Wheel

दोस्तों आज हम पढ़ेंगे, ग्राइंडिंग व्हील में प्रयोग होने वाले बाइन्डर के प्रकार – Types of Binders or Bond in Grinding Wheel, बिट्रिफाइंड बॉण्ड (Vitrified Bond), सिलिकेट बॉण्ड (Silicate Bond), चपड़ा बॉण्ड (Shellac Bond), रेजिन बॉण्ड (Resin Bond), रबर बॉण्ड (Rubber Bond), धातु बॉण्ड (Metal Bond), ऑक्सीक्लोराइड बॉण्ड (Oxychloride Bond) आदि, कृपया इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें।

ग्राइंडिंग व्हील में प्रयोग होने वाले बाइन्डर के प्रकार – Types of Binders or Bond in Grinding Wheel

ग्राइंडिंग व्हील Grinding Wheel

एब्रेसिव कणों को आपस में बाँधकर रखने को एक चिपकाने वाले पदार्थ की अवश्यकता रहती है। यह चिपकाने वाले पदार्थ ही ग्राइन्डिंग स्टोन अथवा ग्राइन्डिंग व्हील को सामर्थ्य (Strength) प्रदान करता है। वाइन्डर का जोड़ जितना मजबूत होगा ग्राइन्डिंग व्हील की उम्र (Life) उतनी ही अधिक होटी है। बॉण्ड की कठोरता की माप ही ग्राइन्डिंग व्हील का ग्रेड (Grade)कहलाता है।ग्राइन्डिंग व्हील के लिए अग्र प्रकार के बाइन्डरों (Binders) को प्रयोग किया जाता हैं। ग्राइंडिंग व्हील में प्रयोग होने वाले बाइन्डर निम्न लिखित प्रकार के होते हैं:-

  1. बिट्रिफाइंड बॉण्ड (Vitrified Bond)
  2. सिलिकेट बॉण्ड (Silicate Bond)
  3. चपड़ा बॉण्ड (Shellac Bond)
  4. रेजिन बॉण्ड (Resin Bond)
  5. रबर बॉण्ड (Rubber Bond)
  6. धातु बॉण्ड (Metal Bond)
  7. ऑक्सीक्लोराइड बॉण्ड (Oxychloride Bond)

बिट्रिफाइंड बॉण्ड (Vitrified Bond)

यह लाल भूरे रंग की बिशेष प्रकार की मिटटी (Clay) होती है, जो गर्म करने पर पिघल (Fuse) जाती हैं। तथा मजबूत बॉण्ड बनाती है। इसमें मुख्यतः फेल्सपार (Felspar) होती है। विट्रीफाइड क्ले के अतिरिक्त कुछ अन्य तापसह (Refractory) पदार्थ मिलाकर प्रयोग करते हैं। पानी के साथ एब्रेसिव कणों को धोकर उसमें उपरोक्त के साथ प्लास्टिक अवस्था में मिलाकर वांछित आकार प्रदान करते हैं। तत्पश्चात इन्हें खुले वातावरण में सुखाया जाता हैं। अब इनको भटटी में 1260 अंश C तक पकाते हैं। इससे ये मजबूत हो जाते हैं। तथा इनकी कटाई (ग्राइन्डिग) करने की छमता बहुत अधिक बढ़ जाती हैं।

विट्रीफाइड बॉण्ड (Vitrified Bond) वाले ग्राइन्डिंग व्हील, उच्चताप सहने वाले (High Temperature Resistant) तथा अधिक समय तक कार्य करने की छमता वाले होते हैं। इनकी झटके सहन करने की छमता कम होती है। बिट्रिफाइंड बॉण्ड (Vitrified Bond) को अंग्रेजी के अछर ‘V’ से प्रदर्षित किया जाता हैं।

सिलिकेट बॉण्ड (Silicate Bond)

सिलिकेट बॉण्ड (Silicate Bond) में एब्रेसिव कणों को बांधने के लिए सिलिकेट प्रयोग किया जाता हैं।सिलिकेट मिले कणो को साँचे में डालकर, सुखाकर, भटटी में 260 अंश C तापमान पर पकाया जाता हैं। अच्छी सामथर्य (Strength) के ग्राइन्डिंग व्हील बनाने के लिए इन्हें हाइड्रॉलिक प्रैस पर उच्च दाब पर दबाया जाता है। तथा इसके पस्चात खुले वातावरण में सुखाने के बाद भटटी में पकाया जाता हैं। ये ग्राइन्डिंग व्हील हाई टैंसाइल स्टैंथ (High Tensile Strength) वाले होते है तथा ग्राइन्डिग प्रक्रिया जॉब को अधिक गर्म नहीं करते। इसीलिए इनका प्रयोग कटिंग टूलों की धार बनाने का कठोरीकृत कार्यखण्डों की ग्राइन्डिंग करने के लिए किया जाता हैं। ये ग्राइन्डिंग व्हील, विट्रीफाइड की अपेक्षा अधिक तेजी से घिसते हैं। इनको अंग्रेजी वर्णमाला के अछर ‘S’ के द्वारा व्यक्त किया जाता हैं।

चपड़ा बॉण्ड (Shellac Bond)

चपड़ा बॉण्ड (Shellac Bond) एबेसिव कणों (Abrasive Particles) को चपड़े के साथ गर्म करके मिला लेते हैं। इनको गर्म मोल्डों में भरकर हाइड्रॉलिक मशीन में निश्चित दाब पर दबाकर, ठण्डा करके निकाल लेते हैं। इन पट्टियों में अच्छी इलास्टिसिटी (Elasticity) होती हैं। इन ग्राइन्डिंग व्हील के द्वारा ग्राइन्डिंग करने पर जॉब गर्म नहीं होते तथा तथा अच्छी सर्फेस फिनिश (Surface Finish) प्रदान करते हैं। इनको अंग्रेजी के अछर ‘E’ के द्वारा प्रदर्शित किया जाता हैं। इनको तेल तथा कास्टिक सोडा से बचाना चाहिए।

रेजिन बॉण्ड (Resin Bond)

रेजिन बॉण्ड (Resin Bond) एब्रेसिब कणों को बांधने के लिए सिन्थेटिक रेजिन का प्रयोग किया जाता हैं, फिर इन्हे निश्चित आकार के मोल्डो में ढाल लिया जाता हैं। इसके पश्चात 200 अंश C तक गर्म करके सामर्थ्य प्रदान की जाती हैं। इन पहियों में बेकेलाइट (Bakelite) तथा रैंडमनॉल (Redmanol) आदि रेजिन का प्रयोग किया जाता हैं। ये पहिये अच्छी सामर्थ्य वाले होते हैं तथा इनको अति उच्च गति पर प्रयोग किया जाता हैं।इनको अंग्रेजी के अछर ‘B’ से व्यक्त किया जाता हैं।

रबर बॉण्ड (Rubber Bond)

रबर बॉण्ड (Rubber Bond) एब्रेसिब कणों को रबर तथा गन्धक के साथ मिलाकर, वांछित आकार (Shape) में गर्म करके ढाल लेते हैं। इनको पतले सेक्शनों में ढाल सकते हैं। इनका प्रयोग अच्छे स्तर की सर्फेस फिनिश के लिए किया जाता हैं। आवश्यक्तानुसार पानी को एक कूलैंट (Coolant) की भांति प्रयोग किया जा सकता हैं। इनको अंग्रेजी के अछर ‘R’ के द्वारा प्रदर्शित किया जाता हैं।

धातु बॉण्ड (Metal Bond)

धातु बॉण्ड (Metal Bond) डायमण्ड पावडर के ग्राइन्डिंग व्हील बनाने के लिए मैटल बॉण्ड (Metal Bond) का प्रयोग किया जाता हैं।इसके लिए पावडर मैटेलजी (Powder Metallurgy) का प्रयोग किया जाता हैं। इसमें मैटल पावडर को डायमण्ड पावडर के साथ मिलाकर उच्च दाब पर दबाया जाता हैं। इसके पश्चात सिंटरिंग यह मजबूत ताप पर सिंटरिंग की जाती हैं। यह मजबूत बॉण्ड वाला, लम्बी आयु वाला तथा सामथ्यवान (Strength) ग्राइन्डिंग व्हील होता हैं। इसका प्रयोग बहुत अधिक हार्ड मैटल को ग्राइंड करने के लिए किया जाता हैं; जैसे-टंग्स्टन, कार्बाइड आदि।

ऑक्सीक्लोराइड बॉण्ड (Oxychloride Bond)

ऑक्सीक्लोराइड बॉण्ड (Oxychloride Bond) मैग्नीशियम के क्लोराइड तथा ऑक्साइड का मिश्रण एक सीमेन्ट की भाती कार्य करता हैं। एब्रेसिब कणों को इसके साथ मिलाकर भटटी में पकाकर इसके ग्राइन्डिंग व्हील तैयार किये जाते हैं। इनको बिना किसी कूलैंट के प्रयोग किया जाता हैं।

FAQs

ग्राइंडिंग व्हील में प्रयोग होने वाले बाइन्डर के कितने प्रकार होते हैं?

ग्राइंडिंग व्हील में प्रयोग होने वाले बाइन्डर निम्न लिखित प्रकार के होते हैं:- बिट्रिफाइंड बॉण्ड (Vitrified Bond), सिलिकेट बॉण्ड (Silicate Bond), चपड़ा बॉण्ड (Shellac Bond), रेजिन बॉण्ड (Resin Bond), रबर बॉण्ड (Rubber Bond), धातु बॉण्ड (Metal Bond), ऑक्सीक्लोराइड बॉण्ड (Oxychloride Bond) आदि।

रबर बॉण्ड क्या होता है?

रबर बॉण्ड (Rubber Bond) एब्रेसिब कणों को रबर तथा गन्धक के साथ मिलाकर, वांछित आकार (Shape) में गर्म करके ढाल लेते हैं। इनको पतले सेक्शनों में ढाल सकते हैं। इनका प्रयोग अच्छे स्तर की सर्फेस फिनिश के लिए किया जाता हैं। आवश्यक्तानुसार पानी को एक कूलैंट (Coolant) की भांति प्रयोग किया जा सकता हैं। इनको अंग्रेजी के अछर ‘R’ के द्वारा प्रदर्शित किया जाता हैं।

निष्कर्ष

दोस्तों आज हमनें पढ़ा, ग्राइंडिंग व्हील में प्रयोग होने वाले बाइन्डर के प्रकार – Types of Binders or Bond in Grinding Wheel, बिट्रिफाइंड बॉण्ड (Vitrified Bond), सिलिकेट बॉण्ड (Silicate Bond), चपड़ा बॉण्ड (Shellac Bond), रेजिन बॉण्ड (Resin Bond), रबर बॉण्ड (Rubber Bond), धातु बॉण्ड (Metal Bond), ऑक्सीक्लोराइड बॉण्ड (Oxychloride Bond) आदि, कृपया इस आर्टिकल को शेयर करना ना भूलें, धन्यवाद।

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